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UGC NET हिंदी इकाई –4: आधुनिक वाद: मार्क्सवाद, मनोविश्लेषणवाद, अस्तित्ववाद और उत्तर आधुनिकतावाद

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आधुनिक वाद: मार्क्सवाद, मनोविश्लेषणवाद, अस्तित्ववाद और उत्तर आधुनिकतावाद आधुनिक युग की शुरुआत में कई दार्शनिक और वैचारिक आंदोलन सामने आए, जिन्होंने समाज, मानव चेतना और वास्तविकता के बारे में हमारी समझ को चुनौती दी। मार्क्सवाद , मनोविश्लेषणवाद , अस्तित्ववाद और उत्तर आधुनिकतावाद इन आंदोलनों के प्रमुख स्तंभ हैं।  ये केवल दर्शन नहीं, बल्कि ऐसे विचार हैं जिन्होंने राजनीति, कला, साहित्य और संस्कृति को गहराई से प्रभावित किया। आइए, इन प्रमुख आधुनिक वादों को विस्तार से समझते हैं। 1. मार्क्सवाद (Marxism) मार्क्सवाद एक सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक दर्शन है जिसे कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स ने विकसित किया था। यह सिद्धांत समाज में वर्ग-संघर्ष और पूँजीवाद की आलोचना पर केंद्रित है। मुख्य सिद्धांत: ऐतिहासिक भौतिकवाद (Historical Materialism): मार्क्स का मानना था कि इतिहास आर्थिक परिस्थितियों और उत्पादन के साधनों से निर्धारित होता है, न कि विचारों से। वर्ग-संघर्ष (Class Struggle): समाज को दो मुख्य वर्गों में विभाजित किया गया है: बुर्जुआ (पूँजीपति) और सर्वहारा (मजदूर) । मार्क्स के अनुसा...

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